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हजारों साल पहले हरियाणा के लोग यूज करते थे हर्बल शैंपू

Haryana News : राखीगढ़ी महोत्सव (rakhigrhaee mahotsav) में स्टॉल पर प्रदर्शित बर्तनों में आंवला शिकाकाई  के अंश के  अंश को दिखाया गया है। जिससे ये पता चलता है कि हजारों साल पहले हरियाणा के लोग हर्बल शैंपू का इस्तेमाल करते थे। साथ ही महिलाओं के कैश सज्जा आदी के बारे में संकेत मिले है। चलिए जानते हैं इनके बारे में विस्तार से। 

 
हजारों साल पहले हरियाणा के लोग यूज करते थे हर्बल शैंपू

HR Breaking News (Haryana News) : आज बाजार में प्राकृतिक तत्वों से बने शैंपू (rakhigrhaee mahotsav news) और साबुन की खूब इस्तेमाल होता है। लेकिन सरस्वती सिंधु सभ्यता (sarasvati sindhu sabhyata) के लोग भी हजारों साल पहले वनस्पतियों के गुणों से परिचित थे। हिसार जिले के बनावली पुरास्थल से मिले पुरातात्विक साक्ष्य बताते हैं कि उस समय में (Saraswati Indus Civilization)  बालों की धोने और देखभाल के लिए आंवला, शिकाकाई जैसे प्राकृतिक पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता रहा होगा। इन साक्ष्यों के आधार पर तैयार किए गए साबुन के नमूने राखी गाड़ी महोत्सव में प्रदर्शित किए गए हैं।

वनस्पतियों को पीसकर तैयार करते थे मिश्रण

 

बनावली (banavali news) में खुदाई के दौरान मिले कुछ बर्तनों का वैज्ञानिक अध्ययन करने पर प्राकृतिक तत्वों के इस्तेमाल से जुड़े संकेत मिले हैं। पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार उस समय लोग वनस्पतियों को पीसकर  उनका मिश्रण या पेस्ट तैयार करते होंगे। इसका उपयोग बालों को धोने और संवारने के लिए क्या जाता होगा। हालांकि यह तैयार उत्पाद आज के शैंपू की तरह बोतलों में उपलब्ध नहीं थे। बल्कि प्राकृतिक संसाधनों से बनाए जाने वाले मिश्रण थे।

उस दौर की सौंदर्य की जानकारी की दिखी झलक

 

सरस्वती सिंधु सभ्यता (haryana rakhigrhaee news) के विभिन्न पुरस्तों से मिली महिला मृण्मूर्तियां उस दौर की सौंदर्य परंपराओं की जानकारी देती है। इन मूर्तियों में महिलाओं के बालों को जूड़े और अलग-अलग आकर्षण शैलियों में सजाया हुआ दिखाया गया है। इसे पता चलता है कि उसे समय महिलाओं की श्रृंगार के प्रति रुचि रही रही है। 

 

सीएम ने ली जानकारी 

 

बनावली से प्राप्त पुरातात्विक साक्ष्यप को आधार बनाकर तैयार किए गए हर्बल शैंपू और साबुन के नमूने राखीगढ़ी महोत्सव के स्टॉल पर रखे गए हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी (Chief Minister Nayab Singh Saini) ने भी स्टाल पर पहुंचकर इन उत्पादों और उनसे जुड़े ऐतिहासिक साक्ष्यों के बारे में जानकारी ली। 

 

प्राकृतिक मिश्रणों इस्तेमाल के मिले संकेत

 

हरियाणा पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के उपनिदेशक नरेंद्र परमार (Narendra Parmar, Deputy Director, Haryana Archaeology and Museums Department) के अनुसार बनावली में मिले अवशेषों से प्राकृतिक मिश्रणों के इस्तेमाल के संकेत मिला है। इन्हीं के आधार पर संपूर्ण साबुन के नमूने तैयार प्रदर्शित किए गए हैं।