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cement rate : घर बनाना होगा महंगा, 10 से 15 रुपये प्रति बैग बढ़ेंगे सीमेंट के दाम

cement rate : अगर आप अपने सपनों का घर बनाने की सोच रहे हैं तो यह खबर आपके लिए अहम है। दरअसल बढ़ती महंगाई के इस दौर में घर बनाने की सभी सामग्रियों के रेट बहुत ज्यादा हाई हो गए हैं। वहीं हाल ही में सीमेंट कंपनियों ने सीमेंट के रेट में बढ़ोतरी की है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2026 में सीमेंट का रेट 10 से 15 प्रति बैग और बढ़ सकता है। चलिए खबर में जानते हैं विस्तार से -

 
cement rate : घर बनाना होगा महंगा, 10 से 15 रुपये प्रति बैग बढ़ेंगे सीमेंट के दाम

HR Breaking News - अपना घर बनाने का सपना हर किसी का होता है, लेकिन आज बढ़ती महंगाई कैसे दूर में खुद का घर बनाना इतना आसान नहीं है। अब यह काम और मुश्किल होने वाला है। दरअसल ताजा रिपोर्ट के अनुसार, सीमेंट कंपनियां सीमेंट की कीमतों (cement rate 2026) में बढ़ोतरी कर सकती हैं। इनपुट लागत में हो रही बढ़ोतरी के चलते कंपनियों को सीमेंट के रेट बढ़ाने पड़ रहे हैं। इस समय बाजारों में सीमेंट की मजबूत मांग है सीमेंट के दाम बढ़ने के बाद भी मांग पर कोई असर नहीं पड़ा है। 

सीमेंट में 10 से 15 रुपये की बढ़ौतरी (cement rate hike)


रिपोर्ट के अनुसार, इस समय कंस्ट्रक्शन का सीजन चल रहा है। बाजार में सीमेंट की मांग मजबूत बनी हुई है। इस बीच कंपनियों की ओर से सीमेंट के रेट में बढ़ोतरी करने की संभावना ज्यादा है। इससे पहले भी कंपनियों ने सीमेंट के रेट में 10 से 15 की बढ़ोतरी की थी, लेकिन अब बिजली और ईंधन की बढ़ती कीमतों की भरपाई करने के लिए कंपनियां एक बार फिर सीमेंट के रेट (cement rates) में बढ़ोतरी कर सकती हैं। पिछली तिमाही में कंपनियों की ओर से बढ़ाए गए सीमेंट के रेट के बाद जुलाई और अगस्त के सीजन में कीमतों में गिरावट आई थी जिससे कंपनियों का घाटा और ज्यादा पड़ गया। अनुमान है कि इस बार भी कंपनियां सीमेंट में 10 से 15 रुपये प्रति बोरी की बढ़ौतरी कर सकती है। 

इस वजह से बढ़े सीमेंट के दाम - 

पिछले 6 से 7 महीने में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी होने से सीमेंट उद्योग (cement industry) के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। जुलाई 2026 में थोड़ी राहत मिली थी, लेकिन उसके बाद से लागत ज्यादा आ रही है। फिलहाल पेटकोक को की कीमत 175 डॉलर प्रति टन और आयातित कोयले का रेट (koyle ka rate) 150 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया है, जो दूसरी तिमाही के औसत से से 20% ज्यादा है। इसके अलावा बोरियों की पैकिंग में उपयोग होने वाले पॉलिप्रोपाइलीन ग्रेन्युल के रेट भी 135 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं। कंपनियों को प्रतिदिन 300 से 400 की अतिरिक्त लागत उठानी पड़ रही है। 

लागत बढ़ने के बाद भी बाजार में सीमेंट की मांग मजबूत है। नॉन ट्रेड सेगमेंट के दम पर इस वित्त वर्ष की पहली छमाही में सालाना आधार पर 7 से 8% की ग्रोथ देखने को मिल सकती है।


7 प्रतिशत बढ़ सकती है सीमेंट की मांग -


रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 18 महीना तक यह मांग मजबूत रहेगी। इसकी बड़ी वजह आने वाले व्यस्त निर्माण सीजन और 2019 की शुरुआत में होने वाले आम चुनाव से पहले तेज होने वाली बुनियादी ढांचा गतिविधियां है। वित्त वर्ष 2026 से 2028 के बीच सीमेंट की कुल मांग 7 प्रतिशत की चक्रवृद्धि दर से बढ़ने की संभावना है।