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Cheque Bounce Law : चेक बाउंस होने पर कितने साल की सजा और जुर्माना, चेक लेने वाले जान लें इससे जुड़े नियम कानून

चेक के बाउंस होने पर बैंक की तरफ से आपको एक रसीद दी जाती है, जिसमें चेक बाउंस होने की वजह के बारे में बताया जाता है. यदि आपका कोई चेक बाउंस होता है, तो देनदार को 30 दिन के अंदर नोटिस भेजना होता है.आइए जानते है इसके बारे में विस्तार से.

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Cheque Bounce Law : चेक बाउंस होने पर कितने साल की सजा और जुर्माना, चेक लेने वाले जान लें इससे जुड़े नियम कानून

HR Breaking News (नई दिल्ली)। चेक बाउंस, इसे बैंकिंग में एक नकारात्‍मक स्थिति माना जाता है. कभी-कभी ऐसा होता है कि जब रिसीव्‍ड चेक को बैंक में पेमेंट के लिए दिया जाता है तो वो रिजेक्‍ट हो जाता है. बैंक इस चेक को बिना पेमेंट के ही वापस भेज देती है. इस स्थिति को ही चेक बाउंस होना कहते हैं. जो व्‍यक्ति चेक देता है और उस पर साइन करता है, उसे Drawer यानी देनदार कहते हैं. जो व्‍यक्ति चेक रिसीव करता है और बैंक में पेमेंट के लिए जमा करता है उसे Payee यानी लेनदार कहा जाता है. जानिए अगर चेक बाउंस हो जाता है तो आपको क्‍या करना चाहिए.

चेक बाउंस होना है क्राइम


चेक बाउंस होने की स्थिति में आपको आपका पैसा नहीं मिल पाएगा. इसके अलावा पेनल्‍टी के तौर पर रकम आपके अकाउंट से ही कटेगी. अगर कोई व्यक्ति आपको चेक द्वारा भुगतान करता है और आप उस चेक को बैंक में जमा कराते हैं, लेकिन यदि वह चेक बाउंस हो जाता है, तो आपको चेक बाउंस होने के सूचना उस व्यक्ति को देनी होगी.

उसके 1 महीने के अंदर-अंदर उस व्यक्ति को आपको भुगतान करना होगा. अगर वह व्यक्ति आपके नियत समय तक भुगतान नहीं करता है, तो आप उसे लीगल नोटिस भेज सकते हैं. यदि वह तब भी भुगतान नहीं करता है, तो आप उसके खलाफ केस दायर कर सकते हैं.

आप उसके खिलाफ Negotiable Instrument Act 1881 के सेक्शन 138 के तहत केस दर्ज करा सकते हैं. भुगतान की रकम सही समय पर न लौटाने पर एक आपराधिक शिकायत के तौर पर आपका केस दर्ज किया जाएगा.

कब होगा धारा 138 का प्रयोग


किसी भी तरह का कर्ज या बकाया पैसों की रिकवरी न होने पर या फिर दो पार्टियों के बीच हुए लेनदेन के बाद जब पेमेंट न मिले और चेक बाउंस हो जाए, तो धारा 138 के तहत केस दर्ज किया जा सकता है. किसी लोन के डिस्चार्ज के दिया गया चेक बाउंस हो जाता है, तो उसपर भी धारा 138 के तहत केस दर्ज हो सकता है. ऐसी स्थिति में चेक देने वाले व्‍यक्ति को 2 साल की सजा और ब्याज के साथ दोगुनी रकम आपको देनी पड़ सकती है. इस बात का ध्‍यान रखें कि केस उसी जगह दर्ज किया जाएगा, जहां पर आप रहते हैं.

3 माह के अंदर कैश करा लें चेक


चेक मिलने के 3 महीने के अंदर अपना चेक अकांउट में जमा कराएं. 3 महीने के बाद किसी भी चेक की वेलिडिटी खत्म हो जाती है. अगर किसी व्यक्ति से रुपए उधार लिए हैं, तो उसे लौटाने के लिए चेक का प्रयोग करें. किसी भी संस्था को डोनेशन देने के लिए चेक का ही इस्तेमाल करें. लोन आदि का भुगतान करने के लिए आप चाहें तो पोस्ट डेटेड चेक भी जमा करा सकते हैं.

बैंक बताता है चेक बाउंस होने की वजह


चेक के बाउंस होने पर बैंक की तरफ से आपको एक रसीद दी जाती है, जिसमें चेक बाउंस होने की वजह के बारे में बताया जाता है. यदि आपका कोई चेक बाउंस होता है, तो देनदार को 30 दिन के अंदर नोटिस भेजना होता है. नोटिस भेजने के बाद भी अगर देनदार 15 दिन तक अगर देनदार कोई जवाब नहीं देता है, तो लेनदार उसके खिलाफ केस दायर कर सकता है. चेक बाउंस होने पर देनदार को 2 साल की सजा हो सकती है. साथ ही देनदार को ब्याज के पूरा  रुपया चुकाना पड़ता है.