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Income tax Rules : क्या शेयर बाजार की कमाई पर भी लगेगा टैक्स, जान लें आयकर विभाग के नियम

Income tax New Rule : आज के समय में ज्यादातर निवेशक शेयर बाजार में निवेश करना पसंद करते हैं। ऐसे में अक्सर लोगों को इस बात की कंफ्यूजन होती है कि क्या शेयर बाजार की कमाई (stock market earnings) पर भी टैक्स का भुगतान करना होता है। इसको लेकर आयकर विभाग ने नए नियम बना दिये हैं। आइए जानते हैं इनकम टैक्स विभाग के इस नियम के बारे में पूरी जानकारी।

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Income tax Rules : क्या शेयर बाजार की कमाई पर भी लगेगा टैक्स, जान लें आयकर विभाग के नियम

HR Breaking News (stock market tax rule) भारत में रह रहे हर नागरिक को इनकम टैक्स अदा करना होता है। आयकर विभाग ने सालाना आय के आधार पर टैक्स भरने की अलग अलग सीमा निर्धारित की है। विभाग द्वारा जारी किये गए नियमों (Income tax New Rule) के मुताबिक 12 लाख की वर्षिक आय पर किसी तरह का कोई टैक्स नहीं देना होता है। कोई भी व्यक्ति अगर इनकम टैक्स के दायरे में आता है तो उसको टैक्स का भुगतान करना होता है। आज हम जानेंगे कि क्या शेयर बाजार की कमाई पर भी टैक्स चुकाना होगा।

 

 


जानिये क्या कहते हैं इनकम टैक्स के नियम 

इनकम टैक्स के नियमों के मुताबिक किसी व्यक्ति की कमाई को 5 अलग-अलग कैटेगरी में बांट दिया जाता है। इसमें पहली है सैलरी से हुई कमाई, दूसरी है हाउस प्रॉपर्टी से हुई कमाई, तीसरी है बिजनेस या प्रोफेशन से हुई कमाई, (New Rule of income tax) चौथी है कैपिटल गेन से हुई कमाई और पांचवीं है अन्य स्रोत से हुई कमाई। इन सभी कमाई के आधार पर ही कैटेगरी को बांटा जाता है।


जानिये किस केटेगरी में आती है शेयर बाजार 

अगर आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं, तो फिर आपकी कमाई दो तरह से टैक्स के दायरे में शामिल की जा सकती है। अगर आप शेयर खरीदकर बाद में बेचते हैं और उसकी वजह से मुनाफा कमाते हैं, तो उसे कैपिटल गेन (capital gains tax) माना जाता है। साथ ही में अगर आपको डिविडेंड मिल जाता है तो वो “अन्य स्रोत से आय” की कैटेगरी में शामिल कर दिया जाता है।

कैपिटल गेन पर देना होगा इतना टैक्स 

बता दें कि कैपिटल गेन दो तरीके के होते हैं। इसमें पहला होता है लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG)। ये तब माना जाता है जब आप किसी शेयर को कम से कम एक साल बाद बेचते हैं। साथ ही में दूसरा है शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG)। यह तब माना जाता है जब आप किसी शेयर को 1 साल से पहले ही बेच देते हैं।


जानिये लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स में फर्क 

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के मामले में 1.25 लाख रुपये तक की कमाई पर टैक्स छूट दी जाती है। इससे ज्यादा की कमाई करने पर 12.5 प्रतिशत टैक् का भुगतान करना होता है। वहीं शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (Tax on Short Term Capital Gains) पर टैक्स जब लगता है जब आपको 20 प्रतिशत के फ्लैट टैक्स का भुगतान करना होता है। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप इनकम टैक्स के दायरे में शामिल की जाती है।

अन्य स्रोत में होने वाली कमाई में शामिल 

अगर आपको इंट्राडे ट्रेडिंग से मुनाफा होता है या फिर आपको डिविडेंड दिया जाता है तो फिर उसे “अन्य स्रोत से आय” (Income from other sources) में शामिल किया जाता है। इस आय पर आपको अपने टैक्स स्लैब के मुताबिक ही टैक्स का भुगतान करना होता है।

नई टैक्स रिजीम के स्लैब के बारे में जानिये डिटेल 

अगर इस साल के बारे में बात करें तो फिर आपको 12 लाख रुपये तक पर 87ए की रिबेट के साथ पूरी कमाई पर टैक्स की छूट दी जाती है। वहीं दूसरी ओर टीडीएस कटौती (TDS deduction) के बारें में बात करें तो अगर डिविडेंड की राशि 10,000 रुपये से ज्यादा की होती है, तो फिर ब्रोकर या म्यूचुअल फंड कंपनी Section 194 के तहत पहले ही 10 प्रतिशत TDS में कटौती कर देती है। इसको आप ITR भरते समय एडजस्ट कर सकते हैं।

इस समय कट जाता है टीडीएस 

अगर आपने डिविडेंड देने वाली कंपनी को या उस ब्रोकर को, जिसके जरिए आप कंपनी के शेयर की खरीदी या फिर बिक्री करते हैं और आपने अपना वैलिड पैन नंबर नहीं दिया है, तो फिर कंपनी 20 फीसदी टीडीएस (TDS deduction Latest Update) की कटौती करती है। अगर बेकार में ज्यादा टीडीएस कटवाने से बचना चाहते हैं तो फिर सही पैन को दर्ज करें।

इनको नहीं देना होता है कोई टैक्स 

अगर आपकी कुल कमाई आपको मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा के अंदर शामिल की जाती है तो फिर आप पर कोई टैक्स नहीं लगता है। जैसे नई टैक्स व्यवस्था में आपको 4 लाख रुपये तक की कमाई (TDS New Rule) पर टैक्स छूट दी जाती है। इस स्थिति में अगर आपकी कुल कमाई 4 लाख रुपये से कम की है तो फिर आपको कोई टैक्स का भुगतान नहीं करना होता है।

ITR भरते वक्त इन दस्तावेजों को रखें अपने पास 

अगर आप नौकरी के साथ-साथ शेयर बाजार में भी निवेश करने की सोच रहे हैं तो फिर ITR फाइल करते समय आपको इन दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है। इन दस्तावेजों में फॉर्म-16, फॉर्म 26AS, एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (Annual Information Statement), कैपिटल गेन स्टेटमेंट और टैक्स प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट को शामिल किया गया है।

नई टैक्स व्यवस्था में मिली 12 लाख तक छूट 

इस साल से नई इनकम टैक्स व्यवस्था में भले ही 12 लाख रुपये तक की कमाई पर रिबेट के साथ छूट उपलब्ध करा दी गई हो लेकिन ये सबके लिए नहीं होती है। अगर आपको कुछ कैपिटल गेन (capital gains tax) होता है तो फिर उस कमाई को इसमें मर्ज नहीं किया जाता है। फिर चाहे भले ही यह कैपिटल गेन आपको शेयर बाजार से हुआ हो या फिर किसी प्रॉपर्टी को बेचकर हुआ हो।

पुरानी टैक्स व्यवस्था पर होगा ये नियम 

अगर आपने पुरानी टैक्स व्यवस्था का चयन करते हैं तो भी कैपिटल गेन पर लगने वाले टैक्स की दर समान ही रहती है। हालांकि, पुरानी टैक्स व्यवस्था में आपको 2.5 लाख रुपये तक की कमाई पर ही टैक्स छूट (tax exemption) उपलब्ध कराई जाती है। अगर कमाई इससे ज्यादा की होती है तो फिर उस पर आपको फ्लैट तय दरों से टैक्स का भुगतान करना होता है। वहीं अगर आपकी कमाई अन्य स्रोत के तहत शामिल की जाती है यानी की डिविडेंड से हुई कमाई, तो उस पर पुरानी टैक्स व्यवस्था (old tax system) के स्लैब रेट के हिसाब से टैक्स लगाया जाता है।