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Property Vs Gold : पिछले 30 साल में सोने और प्रोपर्टी में किसने दिया ज्यादा रिटर्न, देखें पूरी रिपोर्ट

Property Vs Gold : इन्वेस्टमेंट के लिहाज से सोने और प्रोपर्टी दोनों ही बेहतर है, क्योंकि इन दोनों में निवेश करने पर अच्छा-खासा रिटर्न मिलता है। ऐसे में कई लोगों में मन में इन्वेस्टमेंट से पहले यह सवाल बना रहता है कि आखिर पिछले 30 सालों में सोने और प्रोपर्टी (Property Vs Gold ) में किसने सबसे ज्यादा रिटर्न दिया है। आइए खबर के माध्यम से जानते हैं इसके जवाब के बारे में-
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Property Vs Gold : पिछले 30 साल में सोने और प्रोपर्टी में किसने दिया ज्यादा रिटर्न, देखें पूरी रिपोर्ट

HR Breaking News (Property Vs Gold) जब भी निवेश की बात आती है तो इन्वेस्टर्स के मन में सबसे बड़ा सवाल यह आता है कि आखिर पैसे को कहां निवेश किया जाएगा। पिछले कुछ समय में सोने के साथ ही प्रोपर्टी में निवेश से भी इन्वेस्टर्स को बंपर रिटर्न मिला है, जिस वजह से लोग अक्सर इन दोनों जगहों में इन्वेस्टमेंट (Gold Price vs Property Return)  को लेकर कन्फयूजड रहते हैं। आइए खबर में जानते हैं कि पिछले 30 साल में सोने और प्रोपर्टी से से किसने सबसे ज्यादा रिटर्न दिया है। 

 

2000 में क्या सोने और प्रोपर्टी की वेल्यू


वहीं, साल 2000 की बात करें तो उस समय में जहां प्रोपर्टी का भाव (Gold vs Property Return ) 3,500 रुपये प्रति स्क्वायर फीट पर मौजुद थी वहीं, सोने का भाव कम होकर 4,40,000 रुपये प्रति किलो हो गया। ऐसे में 1 किलो सोना बेचकर आप सिर्फ 126 स्क्वायर फीट की जगह की ही खरीदी कर सकते थे। इस अवधि में प्रॉपर्टी की रफ्तार सोने से कहीं अधिक थी। उस समय में सोने की वैल्यू से बांद्रा में एक मास्टर बेडरूम जितनी जगह ही मिल सकती थी। 

 

2010 में क्या था सोने के भाव 


वहीं, पहले के आंकड़ें देखें तो साल 2010 में सोने के भाव (Gold prices in 2010)  18,50,000 प्रति किलो पर ट्रेड कर रहा था। उस समय देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में  प्रॉपर्टी का रेट 12,000 प्रति स्क्वायर फीट के करीब था। उस समय में आप सोना बेचकर तकरबीन 155 स्क्वायर फीट की प्रॉपर्टी खरीद सकते थे। बता दें कि यह जगह गोरेगांव जैसे पॉश हिस्सों में स्टूडियो अपार्टमेंट जैसी ही थी। अब इस समय में प्रॉपर्टी के मुकाबले सोने में एक बार फिर मजबूत देखी जा रही है।

2020 में सोने से ज्यादा थी प्रॉपर्टी की बढ़ोतरी 


आज से तकरीबन 6 साल पहले 2020 में प्रति किलो सोना 48,00,000 रुपये पर कारोबार कर रहा था। वहीं, प्रोपर्टी तेजी से बढ़कर 35,000 रुपये प्रति स्क्वायर फीट तक पहुंच गई। ऐसे में देखें तो आप सोने को बेचकर सिर्फ 140 स्क्वायर फीट की जगह ही खरीद सकते हैं। यानी बड़े इलाकों में सोने की वैल्यू से केवल पार्किंग की जगह ही मिल पाती। उस समय में प्रॉपर्टी (Property Rate In 2020) की बढ़ोतरी सोने से ज्यादा देखी गई है। 

प्रोपर्टी या सोना किसने दिया ज्यादा रिटर्न 


आंकड़ें देखें तो 2025 में सोने की कीमतें (Gold prices in 2025) 1,02,00,000 प्रति किलो पर पहुंच गई हैं। वहीं, प्रोपर्टी के रेट 45,000 रुपये प्रति स्क्वायर फीट के पास पहुंच गए हैं। यानी देखा जाए तो सोना बेचकर आप तकरीबन 227 स्क्वायर फीट की प्रोपर्टी की खरीदी कर सकते हैं। यह देखा जाए तो लोअर परेल जैसे हिस्सों में एक कमरे के सेट के बराबार का स्पेस है। इससे पता चलता है कि पिछले कुछ सालों में सोने ने प्रॉपर्टी से भी ज्यादा रिटर्न दिया है।

बीते वर्ष प्रोपर्टी से आगे रहा सोना 


आज की तारीख में सोना प्रोपर्टी के मुकाबले अपने इतिहास का सबसे हाई आंकड़ा रहा है। 1995 से 2025 तक के आंकड़ें देखें तो सोना (Gold Rate In 1995 to 2025 ) 4,65,000 रुपये से बढ़कर 1,02,00,000 रुपये पर आ गया है। वहीं, दूसरी ओर प्रति स्क्वायर फीट प्रॉपर्टी की कीमतें 2,500 रुपये से बढ़कर 45,000 हो गई है। बीते वर्ष सोना प्रोपर्टी से आगे रहा है। आंकड़ों के अनुसार 2025 में सोना मुंबई की प्रॉपर्टी से अधिक रिटर्न दे रहा है। हालांकि प्रॉपर्टी में निवेश शुरू से ही लॉन्ग टर्म और लोकेशन-आधारित इन्वेस्टमेंट (Gold-Property Returns In 30 years)  रहा है। जानकारी के लिए बता दें कि दोनों में कौन सा बेहतर है, यह इन्वेस्टमेंट का समय, प्रॉपर्टी लोकेशन और जोखिम उठाने की क्षमता पर डिपेंड करता है। 

सोना और प्रॉपर्टी दोनो अपनी जगह है बेस्ट 


साल 1995 में 1 किलो सोने का भाव (Gold rate in year 1995) 4,65,000 रुपये के आस-पास था। उस समय में आर्थिक राजधानी मुंबई में प्रॉपर्टी का दाम लगभग 2,500 रुपये प्रति स्क्वायर फीट के आस-पास था।  मतलब एक किलो सोना बेचकर आप लगभग 190 स्क्वायर फीट की प्रोपर्टी की खरीदी कर सकते थे। इस कीमत में यह प्रोपर्टी आपको अंधेरी जैसे इलाकों में मिल सकती थी।  इससे यह पता चलता है कि 1995 में सोना और प्रॉपर्टी दोनों ही अपनी जगह मजबूत इन्वेस्टमेंट ऑप्शन थे, लेकिन सोने के जरिए खरीदने योग्य प्रॉपर्टी का साइज काफी बड़ा था।