home page

Success Story : बुजुर्ग होने के बाद भी नहीं टूटे हौसले, रिटायरमेंट कै पैसों से खड़ी कर दी 23 हजार करोड़ की कंपनी

हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहने से कभी सफलता नहीं मिलती। सफलता को हासिल करने के लिए कड़ी से कड़ी मेहनत करनी पड़ती है तब जाकर कुछ फल मिलता है। आज हम आपको इस आर्टिकल में ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं। जिन्होंने बुढ़ापे में भी हार नहीं मानी और रिटारयमेंट के पैसों से 23 हजार करोड़ कंपनी खड़ी कर दी। 

 | 
Success Story : बुजुर्ग होने के बाद भी नहीं टूटे हौसले, रिटायरमेंट कै पैसों से खड़ी कर दी 23 हजार करोड़ की कंपनी 

HR Breaking News (ब्यूरो)। दुनिया में बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो अपनी किस्मत खुद लिखते हैं। इसके लिए वह कड़ी से कड़ी मेहनत करने से पीछे नहीं हटते हैं। लक्ष्मण दास मित्तल इन्हीं लोगों में शामिल हैं। जिस उम्र में लोग रिटायर हो जाते हैं उस आयु में लक्ष्मण दास मित्तल (Lachman Das Mittal) ने बिजनेस की शुरुआत की थी। लक्ष्‍मण दास मित्‍तल सोनालिका ग्रुप के चेयरमैन हैं। यह ग्रुप भारत में तीसरे नंबर का सबसे बड़ा ट्रैक्टर निर्माता है। 


वह देश के सबसे उम्रदराज अरबपति हैं। लक्ष्मण दास मित्तल की कहानी अनोखी है, उन्होंने लोगों के लिए एक मिसाल कायम की है। अगर कोई अपनी जिंदगी में कुछ करना चाहता है तो वह कर सकता है। लक्ष्मण दास (Lachman Das Mittal) ने दिखा दिया कि सफलता किसी भी उम्र में हासिल की जा सकती है। अगर पूरी मेहनत और लगन से कोशिश की जाए तो कुछ भी असंभव नहीं है। आईए आपको बताते हैं कैसे लक्ष्मण दास मित्तल ने जिंदगी में इतनी बड़ी सफलता हासिल की है।

इंश्योरेंस एजेंट से बने बिजनेस टायकून

लक्ष्मण दास मित्तल का जन्म पंजाब के होशियारपुर में हुआ था। उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत एक बीमा एजेंट के रूप में की थी। लक्ष्मण दास मित्तल एलआईसी एजेंट हुआ करते थे। वह कारोबार करना चाहते थे।

इसके लिए उन्होंने अपनी सैलरी से पाई-पाई जमा की। लक्ष्मण दास मित्तल 60 साल की उम्र तक एलआईसी एजेंट के रूप में काम करने के बाद रिटायर हो गए थे। आमतौर पर लोग रिटायर होकर खुशहाल और शांतिमय जीवन बीताना पसंद करते हैं, लेकिन लक्ष्मण दास मित्तल ने इस उम्र में भी काम और संघर्ष करना नहीं छोड़ा था।

ऐसे शुरू की कंपनी

लक्ष्मण दास मित्तल ने अपनी सारी बचत का उपयोग कृषि मशीनों से जुड़े साइड बिजनेस स्थापित करने के लिए किया, उन्होंने साल 1996 में ट्रैक्टर निर्माण में प्रवेश करके सोनालिका ट्रैक्टर्स की स्थापना की। लक्ष्मण दास मित्तल कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान से भी नवाजे जा चुके हैं। इनमें प्रतिष्ठित उद्योग रत्न पुरस्कार भी शामिल है। लक्ष्मणदास मित्तल की ट्रैक्टर कंपनी का उत्तर भारतीय राज्यों में मजबूत कारोबार है। पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गांवों में सोनालिका के ट्रैक्टर किसानों की पसंद रहे हैं।

दिवालिया होने पर भी नहीं मानी हार

लक्ष्मण दास मित्तल ने अपनी मेहनत के दम पर करोड़ों की कंपनी खड़ी कर दी है। वह भारत के सबसे उम्रदराज अरबपतियों की लिस्ट में शामिल हैं। आज उनकी नेटवर्थ करीब 2.5 अरब डॉलर के आस पास है। एक साधारण एलआईसी एजेंट से लेकर उन्होंने अरबपति तक का सफर तय किया है। ये सफर आसान नहीं था। उन्हें कई बार गिरना पड़ा, कारोबार दिवालिया हो गया, लेकिन उन्होंने हार न मानने की ठान ली थी। मौजूदा समय में सोनालिका ग्रुप का कारोबार 120 से अधिक देशों में फैला हुआ है।