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Success Story : 2000 रुपये उधार लेकर शुरू किया अपना काम, कमाई में अंबानी को भी छोड़ दिया था पीछे

Success Story Of Dilip Shanghvi : आज हम आपको एक प्रेरित करने वाली सफलाता की कहानी बताने वाले हैं। आपको बता दे कि सन फार्मा के संस्थापक और एमडी दिलीप संघवी ने अपनी मेहनत से फार्मा इंडस्ट्री में अच्छी प्रगति की है। आइए जानते हैं पूरी कहानी नीचें खबर में...
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Success Story :  2000 रुपये उधार लेकर शुरू किया अपना काम, कमाई में अंबानी को भी छोड़ दिया था पीछे

HR Breaking News (नई दिल्ली)। सन फार्मास्यूटिकल्स इंडस्ट्रीज देश की 20वीं सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई है। सोमवार को कंपनी का मार्केट कैप तीन लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। साथ ही कंपनी का शेयर एनएसई पर 52 हफ्ते के टॉप पर पहुंच गया। सन फार्मा ने एनटीपीसी को पछाड़कर देश की टॉप 20 वैल्यूएबल कंपनियों में जगह बनाई। कंपनी का शेयर मई में 52 हफ्ते के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया था। तबसे इसमें 40 परसेंट उछाल आई है। सन फार्मा की स्थापना दिलीप सांघवी ने की थी। कभी घूम-घूम कर दवा बेचने वाले दिलीप सांघवी ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर देश की सबसे बड़ी दवा कंपनी बना दी। एक नजर उनके सफर पर..

दिलीप सांघवी का जन्म गुजरात के एक छोटे से शहर अमरेली में हुआ था। उनके पिता शांतिलाल सांघवी कोलकाता में जेनरिक दवाओं की सप्लाई का काम करते थे। कॉलेज पूरा करने के बाद दिलीप सांघवी ने भी पिता के काम में हाथ बंटाना शुरू किया। दवाओं की जानकारी होने के बाद उन्होंने दवाओं के डिस्ट्रीब्यूशन का काम शुरू कर दिया। यानी वह घूम-घूमकर दवाएं बेचते थे। फिर उन्हें लगा कि अगर मैं दूसरों की बनाई दवाई बेच सकता हूं तो फिर अपनी क्यों नहीं। फिर क्या था उन्होंने खुद ही दवाओं के बिजनस में उतरने की ठान ली।

पिता से उधार लिए 2000 रुपये-

दिलीप ने साल 1982 में अपने पिता से 2000 रुपये उधार लिए और अपने दोस्त के साथ मिलकर गुजरात के वापी में अपनी दवा कंपनी सन फार्मा (Sun Pharma) की शुरुआत की। उन्होंने अच्छी क्वालिटी की दवा पर फोकस करते हुए शुरुआत की। शुरू में वो सिर्फ मनोरोग की कुछ दवाएं बनाते थे। दिलीप ने अब अपनी दवाओं को बेचना शुरू किया। 15 साल बाद 1997 में उन्होंने एक अमेरिकी फार्मा कंपनी खरीद ली। इस तरह उन्हें अमेरिका में एंट्री करने का मौका मिल गया। साल 2007 में उन्होंने इजराइल की कंपनी टारो फार्मा को भी खरीद लिया।
 


साल 2014 में सन फार्मा और रैनबक्सी के बीच करार हुआ। सन फार्मा ने रैनबैक्सी को करीब 19 हजार करोड़ रुपये में खरीद लिया। साल 2014 के अंत तक दिलीप सांघवी की कुल संपत्ति 17.8 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई। एक वक्त तो ऐसा भी आया कि वह भारत के सबसे बड़े रईस बन गए। साल 2015 में फोर्ब्स की लिस्ट में दिलीप सांघवी ने मुकेश अंबानी को पछाड़कर देश के सबसे अमीर उद्योगपति का खिताब हासिल कर लिया। फोर्ब्स के मुताबिक साल 2023 में दिलीप सांघवी की कुल संपत्ति 17.8 अरब डॉलर पहुंच गई थी।

कितनी है नेटवर्थ-

ब्लूमबर्ग बिलिनेयर इंडेक्स के मुताबिक दिलीप सांघवी की नेटवर्थ 20.3 अरब डॉलर है। इस साल उनकी नेटवर्थ में 4.72 अरब डॉलर की तेजी आई है। वह भारतीय रईसों की लिस्ट में सातवें और दुनिया के अमीरों में 85वें नंबर पर हैं। सन फार्मा देश की सबसे बड़ी दवा और हेल्थकेयर कंपनी है। इसका मार्केट कैप 301,284.49 करोड़ रुपये है। सन फार्मा के बाद देश की दूसरे सबसे बड़ी दवा कंपनी दिवीज लैबोरेटरीज है जिसका मार्केट कैप 98,621.57 करोड़ रुपये है। सितंबर तिमाही में सन फार्मा का नेट प्रॉफिट छह परसेंट की तेजी के साथ 2,385 करोड़ रुपये रहा जबकि रेवेन्यू 11.3 परसेंट उछलकर 12,192 करोड़ रुपये पहुंच गया।