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एसटीपी के पानी से सिंघराण, कालवास के खेतों में होगी सप्लाई, बिछाई जाएगी 20 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन

Hisar News : हिसार में एसटीपी के उपचारित पानी से अब सिंघराण, कालवास और गावड़ के खेतों में सिचांई होगी। इस प्रोजेक्ट के तहत 20 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इसके लिए करोड़ो रूपये का टेंडर लगाया गया है। चलिए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।    
 
एसटीपी के पानी से सिंघराण, कालवास के खेतों में होगी सप्लाई, बिछाई जाएगी 20 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन

HR Breaking News (Hisar News) : हिसार में सीवरेज के पानी का उपयोग खेती के लिए करने की योजना पर काम आगे बढ़ा है। सिंचाई विभाग (irrigation department) ने पनिहार-चौधरीवास स्मार्ट सिंचाई क्लस्टर के तहत 29.50 करोड़ रुपये का टेंडर आमंत्रित किया है। इस परियोजना के जरिए शहर के सातरोड, डाबड़ा और गंगवा स्थित तीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से निकलने वाले उपचारित पानी को पाइपलाइन के माध्यम से खेतों तक पहुंचाया जाएगा। इससे सिंघरान, कालवास और गावड़ गांवों की करीब 1,700 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होगा। परियोजना से लगभग 971 किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

मजबूत होगी सिंचाई व्यवस्था (Smart Irrigation Cluster) 

योजना के तहत एसटीपी से खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए 20 किलोमीटर लंबा भूमिगत पाइपलाइन नेटवर्क तैयार किया जाएगा। बंद पाइपलाइन के जरिए पानी की आपूर्ति होने से खुले में पानी बहने, बर्बादी और दुर्गंध जैसी समस्याओं से बचाव होगा। किसानों को सिंचाई के लिए पानी का एक अतिरिक्त स्रोत मिलेगा। इससे उन क्षेत्रों में भी खेती को सहारा मिल सकेगा, जहां सिंचाई के पानी की उपलब्धता सीमित है।

पहले टेंडर में एक ही एजेंसी मिली पात्र 

स्मार्ट सिंचाई क्लस्टर के लिए मिकाडा विंग (mikada wing) की ओर से दूसरी बार टेंडर आमंत्रित किया गया है। इससे पहले भी टेंडर जारी किया गया था, जिसमें तीन एजेंसियों ने आवेदन किया था। हालांकि, इनमें से केवल एक एजेंसी ही विभाग की निर्धारित शर्तों और मानकों पर खरी उतरी। ऐसे में सिंगल फर्म के कारण दोबारा टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई है। अब नई प्रक्रिया पूरी होने के बाद परियोजना के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा।

अन्य जिलों में भी लागू हो सकती है व्यवस्था (STP in Hisar)

हिसार में एसटीपी के उपचारित पानी को सिंचाई के लिए इस्तेमाल करने की यह पायलट परियोजना है। इसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों से निकलने वाले अपशिष्ट जल का दोबारा उपयोग सुनिश्चित करना और कृषि क्षेत्र में पानी की उपलब्धता बढ़ाना है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तरह के सिंचाई क्लस्टर विकसित किए जा सकते हैं। खासकर उन क्षेत्रों में ऐसी व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है, जहां किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। योजना के तहत उपचारित पानी का उपयोग सब्जियों सहित अन्य फसलों की सिंचाई में करने की संभावनाएं भी हैं।

टेंडर के बाद शुरू होगी आगे की प्रक्रिया 

मिकाडा, हिसार के एसडीओ कपिल के अनुसार, पनिहार-चौधरीवास स्मार्ट सिंचाई क्लस्टर (Panihar-Choudharywas Smart Irrigation Cluster) के लिए 29.50 करोड़ रुपये का टेंडर आमंत्रित किया गया है। सातरोड, डाबड़ा और गंगवा के तीन एसटीपी से प्रतिदिन निकलने वाले 17 एमएलडी उपचारित पानी को खेतों तक पहुंचाने की योजना है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद परियोजना पर काम आगे बढ़ाया जाएगा।