अब भारतीय हिसाब से मिलेगा कपड़ों का साइज, खत्म होगा 30 की पेंट टाइट, 32 की लुज का झंझट
HR Breaking News (India new clothing size 2026) जब भी हम कपड़े खरीदने जाते हैं, तो सबसे पहले साइज को लेकर उलझन शुरू हो जाती है। कई बार 32 नंबर की पेंट फिट हो जाती है, तो 34 नंबर की पेंट ढीली रहती है। ऐसे में सही फिटिंग वाले कपड़े (Well-fitting clothes) चुनना किसी परेशानी से कम नहीं होता। इसी समस्या को दूर करने के लिए अब भारत में लोगों के शरीर की बनावट क हिसाब से अपना साइजिंग सिस्टम तेयार किया जा रहा है। इससे कपड़ों की खरीदारी आसान होगी और बार-बार साइज बदलने की झंझट भ कम हो सकती है। आइए जान लेते है कपड़ों के साइजिंग सिस्टम को लेकर जारी हुए इस नए अपडेट के बारे में विस्तार से।
आपको बता दे कि अब तक भारत में कपड़ों का साइज (Clothing sizes in India) तय करने के लिए अमेरिका और ब्रिटेन के मापदंडों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में लोगों के शरीर की वैज्ञानिक तरीके से माप लेने की व्यवस्था नहीं थी। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (National Institute of Fashion Technology) की अकादमिक नूपुर आनंद क अनुसार भारतीय ब्रांड अब तक विदेशी साइज चार्ट (International Size Chart) के आधार पर कपड़े बनाते रहे हैं। इसके बाद ग्राहकों की शिकायतों और कपड़ो की वापसी के आधार पर उनमें बदलाव किया जाता था। इसका मतलब है कि अगर कमर का साइज छोटा पड़ता था, तो अगली बार कपड़े का साइज (Clothing sizes) थोड़ा बड़ा कर दिया जाता था।
अब इस समस्या को खत्म करने के लिए कपड़ा मंत्रालय (Ministry of Textiles) के तहत देशभर में 15 साल और उससे अधिक उम्र के 26 हजार से ज्यादा लोगो के शरीर की माप ली गई है। इसी आंकड़े के आधार पर भारतीयों के लिए नए साइज चार्ट तैयार किए जा रहे हैं इस पहल के तहत पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग साइज तय किए जाएंगे। साथ ही कपड़ों पर भारत साइज (India Size) टैग लाने की तैयारी है, ताकि भारतीय शरीर की बनावट के अनुसार सही फिटिंग वाले कपड़े मिल सकें।
शरीर की बनावट के हिसाब से उपलब्ध करवाएं जाएंगे कपड़े
कपड़ों का सही साइज (Correct clothing size) तय करने के लिए भारत ही नहीं, दुनिया के कई देशों में पहले भी ऐसे सर्वे किए जा चुके हैं। कपड़ा मंत्रालय (Ministry of Textiles) के एक अधिकारी के मुताबिक भारत में इस प्रोजेक्ट की तैयारी पूरी हो चुकी है और अब इसे लागू करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसका मकसद सिर्फ कपड़ों का नया साइज तय करना नहीं, बल्कि भारतीयों को उनकी शरीर की बनावट के हिसाब से सही फिटिंग वाले कपड़े उपलब्ध कराना है।
दरअसल ब्रिटेन में भी 2001 से 2004 के बीच लोगों के शरीर की माप लेकर साइजिंग सिस्टम (Sizing system based on body measurements) पर काम किया गया था। इसी तरह अमेरिका में भी कपड़ों की सही फिटिंग के लिए सर्वे (Survey for proper clothing fit) कराया गया। इन देशों में लोगों के शरीर के आकार और माप के आधार पर कपड़ों के साइज तय किए गए, ताकि खरीदारी के समय लोगों को परेशानी नी हो।
नए साइज सिस्टम से होगा बेहद फायदा
भारत में भी अब इसी तरह की व्यवस्था तैयार की जा रही है। नए साइज सिस्टम से कपड़ों की फिटिंग में सुधार (Improving the fit of clothes) होगा और ग्राहकों को अपनी पसंद के कपड़े चुनने में आसानी होगी। खास बात यह है कि इससे कपड़ों की ऑनलाइन खरीदारी (Online shopping) में भी फायदा मिल सकता है, क्योंकि गलत साइज आने पर कपड़े बदलने या वापस करने की नौबत कम होगी। इसका मतलब है कि आने वाले समय में भारतीयों को कपड़े की खरीदारी वक्त 30, 32 और 34 नंबर के साइज को लेकर बार-बार उल्लझन में नहीं पड़ना होगा।
