High Court Decision : किरायेदार को झटका, हाईकोर्ट ने मकान मालिक के हक में सुनाया फैसला
Landlord Rights Update : आए दिन कोर्ट में मकान मालिक और किरायेदारों के बीच कई मामले सामने आते दिख जाते हैं। ऐसे में इलाहबाद हाई कोर्ट ने इस मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट के इस फैसले को जानना हर किरायेदार (Property Knowledge) के लिए काफी ज्यादा जरूरी है, ताकि आने वाले दिनों में उनको किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। आइए विस्तार से जानते हैं कोर्ट के इस फैसले के बारे में पूरी डिटेल।
HR Breaking News - (Rules For Landlord) आए दिन मकान मालिक और किरायेदारों के कई विवाद के मामले कोर्ट में आते रहते हैं। इस बीच किराएदारी कानून के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। फैसले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने बताया कि अपनी संपत्ति (property Rights of owner) का मनचाहा प्रयोग करना एक मालिक का ही अधिकार होता है। इसके अलावा भी कई और फैसले किरायेदारों के खिलाफ सुनाये गए है। ऐसे में आपके लिए ये जानना काफी ज्यादा जरूरी है कि कोर्ट ने मकान मालिक और किरायेदारों के हक में कौन से फैसलों को सुनाया है। खबर में जानिये इस बारे में पूरी डिटेल।
संपत्ति पर कब्जे का रहता है रिस्क-
आमतौर पर देखा जाता है कि लोग घर को बनाकर उसे किराये पर दे देते हैं। इसकी वजह से उनके पास कमाई का एक एक्स्ट्रा स्त्रोत हो जाता है। लेकिन, किराये पर घर (Rent House Rules) को देने से पहले आपको इसके नुकसान के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए। ताकि आने वाले समय में आपको मुश्किलों का सामना न करना पड़े।
अगर इसमें सबसे बड़ा रिस्क के बारे में बात करें तो ये रिस्क संपत्ति (property rules) पर कब्जे का खतरा हो जाता है। दरअसल, कई मकान मालिक घर को किराये पर देने के बाद उसे पूरी तरह से किरायेदार के हवाले ही छोड़ देते हैं, लेकिन इसकी वजह से उनको परेशानी का सामना करना पड़ता है।
जानिये क्या है पूरा मामला-
हाल में जारी मामले के मुताबिक मेरठ के एक वरिष्ठ नागरिक ने दिल्ली रोड पर स्थित अपनी तीन में से दो दुकानों को किराये (Shop for rent in Delhi) पर दे दिया था। दुकान मालिक खुद किराए की दुकान में मोटरसाइकिल मरम्मत और स्पेयर पार्ट्स की बिक्री का काम किया करता था। दुकान मालिक ने किराएदार को दुकान खाली करने के लिए नोटिस को जारी कर दिया।
इसके बाद ये मामला कोर्ट में पहुंच गया। न्यायालय (SC Decision on Landlord Rights) ने किराएदार की बेदखली के आदेश को पारित करते हुए किरायेदार के विरुद्ध की गई अपील को भी खारिज कर दिया गया था। ट्रायल कोर्ट के इस फैसले को किराएदार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
जानिये क्या है याची जा कहना-
याची का मानना था कि बची हुई तीसरी दुकान में दुकान मालिक (dukan malik ke adhikar) आराम से अपने काम को शुरु कर सकता है। किराएदारी कानून के मुताबिक किराएदार की परेशानियों और उसके हित को सर्वोच्च न्यायलय में भेजा गया है। अपने व्यवसाय हेतु किराएदार (kiraydar ke hak) के सुझाव को मानने के लिए दुकान मालिक किसी भी रुप से बाध्य नहीं है।
एक अन्य मामले में कोर्ट ने कही ये बात-
वहीं एक और मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट (highcourt ka faisla) ने जानकारी देते हुए बताया कि अवैध डायग्नोस्टिक सेंटर चलाना आम लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ करना होता है। इसकी वजह से हजारों लोगों के जीवन को खतरा हो सकता है। इसके अलावा उन लोगों के साथ अन्याय भी हो रहा है। जाली प्रमाण पत्रों के आधार पर डायग्नोस्टिक सेंटर (Diagnostic Center) को चलाने वाले आरोपी की भूमिका की जांच करनी भी काफी ज्यादा जरूरी है। कोर्ट ने आरोपी को दी गई अंतरिम सुरक्षा को वापस भी लिया जा सकता है।
