क्या Credit Card के बिल को EMI में बदलना है फायदे का सौदा, या हो जाएगा नुकसान, समझें पूरा गणित
HR Breaking News : (Credit Card Bill) नई तकनीकी के इस जमाने में क्रेडिट कार्ड का प्रयोग लगातार बढ़ता ही जा रहा है। कई बार खर्चे ज्यादा हो जाने की वजह से क्रेडिट कार्ड का बिल बजट से बाहर हो जाता है ऐसे में बैंक की तरफ से क्रेडिट कार्ड के बिल को EMI में बदलने का ऑप्शन दिया जाता है और ज्यादातर लोग इसे अपना भी लेते हैं।
एक तरफ से देखा जाए तो यह काफी सुविधाजनक लगता है क्योंकि एक साथ ज्यादा पैसे देने की वजह हर महीने छोटी रकम के सहारे भी क्रेडिट कार्ड के बिल को कहा जा सकता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि क्रेडिट कार्ड के बिल (Credit Card Bill) को एमी में बदलना फायदे का सौदा है या फिर इसे हमें नुकसान भी हो सकता है। आइए खबर में जानते हैं क्रेडिट कार्ड के बल से जुड़े इस अपडेट के बारे में विस्तार से।
बैंकों की तरफ से दिए जाते है ऑफर
बैंकों की तरफ से क्रेडिट कार्ड के बिल को EMI में बदलने का ऑप्शन दिया जाता है। बैंक ऐसा आपकी मदद के लिए नहीं, बल्कि अपनी कमाई के लिए करते हैं। जब आप अपने कार्ड के बिल को EMI में बदलते हैं, तो असल में वह एक छोटे लोन की तरह हो जाता है। इस पर ब्याज लगता है और कभी-कभी प्रोसेसिंग फीस भी देनी पड़ती है। किस्त हर महीने छोटी लगती है, लेकिन आखिर में आप अपने असली बिल से ज्यादा पैसे चुका देते हैं।
बिल को EMI में बदलना इस समय रहेगा सही
कई बार बिल को EMI में बदलना सही भी साबित होता है। मान लीजिए अचानक बड़ा मेडिकल खर्च आ गया या किसी जरूरी काम के लिए तुरंत यात्रा करनी पड़ गई। ऐसे में अगर आप पूरा क्रेडिट कार्ड बिल (credit card bill) एक साथ भर देते हैं, तो महीने की सारी बचत खत्म हो सकती है। दूसरी तरफ, अगर बिल यूं ही बाकी छोड़ देते हैं तो उस पर बहुत ज्यादा ब्याज लगने लगता है, जो साल में करीब 35% या उससे भी ज्यादा हो सकता है।
अगर उसी बिल को EMI में बदल दिया जाए, तो बढ़ता हुआ ब्याज रुक जाता है और भुगतान एक तय किस्तों में हो जाता है। इसलिए ऐसी परिस्थितियों में EMI थोड़े समय के लिए आर्थिक सहारा बन सकती है।
रखें इन बातों का ध्यान
लिमिट कम हो जाती है-
अगर आपके कार्ड की लिमिट 1 लाख है और आप 80 हजार को EMI में बदल देते हैं, तो उतनी रकम आपकी लिमिट से ब्लॉक हो जाती है। जब तक किस्तें पूरी नहीं चुकतीं, तब तक आप पूरी लिमिट इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।
कुल खर्च बढ़ जाता है-
मान लीजिए आपने 90,000 रुपये का सामान खरीदा। EMI और ब्याज लगने के बाद वही चीज आखिर में करीब 98,000 रुपये तक पड़ सकती है।
हर बार EMI लेना जरूरी नहीं होता
कई बार बिल बड़ा लगता है, लेकिन अगर आपको पता है कि कुछ हफ्तों में पैसे आने वाले हैं, तो EMI बनवाना सिर्फ बेवजह ब्याज बढ़ाने जैसा है। बहुत से लोग त्योहारों की शॉपिंग या ट्रैवल बुकिंग के बाद (Use Of Card For Shopping) आदत में भी बिल को EMI में बदल देते हैं। ऐसे में EMI असली जरूरत से ज्यादा मन को थोड़ी राहत देने का तरीका बन जाती है। लेकिन इस सुविधा के बदले आपको अतिरिक्त पैसे देने पड़ते हैं।
पूरा बिल भरना सही होता है
क्रेडिट कार्ड की ईएमआई (credit card emi) कुछ खास परिस्थितियों में मदद कर सकती है, लेकिन इसे हर बार उपयोग करना सही नहीं है। जब अचानक बड़ा खर्च आ जाए और आपके पास तुरंत पैसे कम हों, तब EMI लेना ठीक है। लेकिन अगर आपके पास भुगतान करने के लिए पर्याप्त पैसा है, तो पूरा बिल एक साथ चुका देना ही सबसे सस्ता और समझदारी वाला विकल्प होता है।
