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Gratuity rules : सरकारी कर्मचारी हो या प्राइवेट, कर दी ये गलती तो नहीं मिलेगा ग्रेच्‍युटी का पैसा

Gratuity new rules : हर सरकारी और प्राइवेट कर्मचारी एक निश्चित समय तक लगातार अपनी सेवाएं देने के बाद ग्रेच्युटी का हकदार हो जाता है। ग्रेच्युटी की राशि (Gratuity payment rules) हर कर्मचारी के लिए बेहद अहम होती है लेकिन कर्मचारी की गलती के कारण इससे कर्मचारी को वंचित भी किया जा सकता है। इस बारे में कई नियम (new rules for Gratuity) भी तय किए गए हैं, आइये जानते हैं किस गलती पर नहीं मिलेगा ग्रेच्युटी का पैसा।
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Gratuity rules : सरकारी कर्मचारी हो या प्राइवेट, कर दी ये गलती तो नहीं मिलेगा ग्रेच्‍युटी का पैसा

HR Breaking News - (Gratuity rules update)। किसी भी कंपनी या विभाग में एक निर्धारित समय तक नौकरी करने के बाद कर्मचारी ग्रेच्युटी पाने का हकदार हो  जाता है। यह समय 5 साल तक का निर्धारित किया गया है। ऐसे कर्मचारी को नियोक्ता की ओर से ग्रेच्युटी (Gratuity kab milti h) की राशि दी जाती है। 


यह राशि कर्मचारी की एक गलती से हाथ से भी निकल सकती है। ग्रेच्युटी संबंधी नियमों को जानने से पता चलता है कि  जरूरी नहीं है कि ये राशि हर हाल में मिलेगी, अगर आपने इस तरह की होई गड़बड़ी या गलती कर दी तो नियोक्ता फटाक से ग्रेच्युटी (Gratuity ke niyam) की राशि को काट लेगा। खबर में जानिये इस बारे में क्या हैं नियम।


इस तरह का नुकसान करने पर रुकेगी ग्रेच्युटी-

ग्रेच्‍युटी पाने और ग्रेच्युटी देने के नियमों का ग्रेच्युटी एक्‍ट 1972 (Gratuity Act 1972) में प्रावधान है। 10 से ज्‍यादा कर्मचारी जहां पर काम करते हैं, उस संस्थान को  ग्रेच्‍युटी देनी होगी और वे कर्मचारी ग्रेच्युटी पाने के हकदार होंगे। कर्मचारी के किसी कार्य से कंपनी को नुकसान होता है और कर्मचारी को निकाला जा रहा है तो कंपनी मालिक उस कर्मचारी की ग्रेच्‍युटी (Gratuity rules for employer) रोक सकता है। कर्मचारी के कारण नियोक्‍ता की संपत्ति को जितने रुपये का नुकसान हुआ है, उतनी ही ग्रेच्‍युटी नियोक्ता रोक सकता है।

नियोक्‍ता को बताया होगा कारण-


बेशक कानून में कंपनी में नुकसान होने पर नियोक्‍ता (employer Gratuity rules) की ओर से उस नुकसान जितनी ग्रेच्युटी रोकने का अधिकार है लेकिन इसमें भी वह मनमानी नहीं कर सकता। इसके लिए उसे कारण बताना होगा।  ग्रेच्‍युटी एक्‍ट (Gratuity Act ) में प्रावधान है कि इसके बाद ही ग्रेच्युटी रोकी जा सकती है। 

ग्रेच्‍युटी को लेकर कानून में यह है प्रावधान -


ग्रेच्‍युटी से जुड़े कानून यानी ग्रेच्युटी एक्‍ट में धारा 4(6)(b)(ii) में प्रावधान है कि अगर कर्मचारी  के कारण या उसकी ओर से किए गए किसी भी कार्य से कंपनी का नुकसान होता है तो नियोक्‍ता कर्मचारी को नोटिस (Gratuity notice rules) जारी करके इस नुकसान के बारे में जवाब मांगेगा। इसके बाद ग्रेच्‍युटी की उतनी राशि रोकी जा सकती है जितना नुकसान हुआ हो। इसमें यह भी कहा गया है कि बेशक यह नुकसान नैतिक कार्य या नैतिक आधार पर हुआ हो।

दिल्‍ली हाईकोर्ट ने दिया यह आदेश-


ग्रेच्युटी को लेकर अब दिल्‍ली हाईकोर्ट (delhi high court) ने भी अपने आदेशों में इस बात को क्लियर कर दिया है अगर कर्मचारी के कारण या उसके कार्यों से कंपनी को नुकसान होता है तो नियोक्‍ता संबंधित कर्मचारी की ग्रेच्‍युटी (Gratuity rules update) को रोकने का अधिकार रखता है। 


हालांकि हाई कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि ग्रेच्‍युटी की पूरी राशि नहीं रोकी जा सकती, केवल उतनी ही राशि रोकी जा सकती है, जितना कंपनी को नुकसान हुआ है। इस नुकसान की भरपाई नियोक्ता रोकी गई ग्रेच्युटी (Gratuity cancel rules) की राशि से कर सकता है।

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