Home Loan EMI : नहीं भर पाए होम लोन की ईएमआई, जानें प्रोपर्टी की निलामी से पहले बैंक देता है कितना समय
HR Breaking News (Home Loan) अक्सर लोग घर लेते समय होम लोन का सहारा लेते हैं, लेकिन कई बार ग्राहकों पर ईएमआई का भार अधिक हो जाता है और उनसे एक या दो बार की ईएमआई मिस हो जाती है। ऐसे में आइए खबर के माध्यम से जानते हैं कि अगर लोन धारक होम लोन की ईएमआई (Home Loan EMI ) समय पर नहीं भर पाता है तो ऐसे में बैंक प्रोपर्टी की निलामी कब तक कर देता है।
कब कर सकता है बैंक घर की नीलामी
अगर लोनधारक सही समय पर लोन का भुगतान नहीं करते हैं तो ऐसे में बैंक बकाया रकम वसूलने के लिए घर की नीलामी करने का अधिकार (home auction rights) रखता है। हालांकि यह प्रक्रिया ईजी नहीं है। इसके लिए बैंक को कई कानूनी नियमों और प्रोसेस से होकर गुजरना पड़ता है।
बता दें कि देशभर में इस प्रोसेस को SARFAESI Act और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India ) के नियमों के तहत लागू किया जाता है। ऐसे में अगर उधार लेने वाला व्यक्ति यानी की लोनधारकर बकाया रकम ब्याज के साथ भुगतान कर देता है, तो ऐसे में घर की नीलामी रूक जाएगी।
कब शुरू होती है नीलामी की कार्रवाई
नियमो के तहत अगर कोई व्यक्ति लगातार 90 दिनों तक होम लोन की EMI को चुकता नहीं करता है तो ऐसे में बैंक की ओर से उस लोन अकाउंट को NPA (non-performing asset) ऐलान कर दिया जाता है। NPA घोषित होते ही बैंक उधारकर्ता को 60 दिन का नोटिस जारी करता है। नोटिस में पूरी एरियर राशि चुकाने को कहा जाता है। अगर उधारकर्ता इस नोटिस (auction action) का जवाब देता है तो ऐसे में बैंक को आधे महीने यानी की 15 दिनों के अंदर ही जवाब देना होता है।
बैंक जारी करता है इतने दिनों का नोटिस
जानकारों का कहना है कि घर की नीलामी का प्रोसेस (house auction process) शुरू होने से पहले बैंक को लगभग 105 दिनों का समय देना होता है। 105 दिन में 60 दिन का नोटिस के लिए शामिल होता है और 15 दिन जवाब के लिए और लगभग 30 दिन बिक्री की सूचना के लिए दिए जाते हैं। ऐसे में अगर पहली बार में घर की बिक्री नहीं होती तो 15 दिन का अतिरिक्त नोटिस भी जारी किया जाता है।
नीलामी से पहले बैंक करता है ये काम
बैंक द्वारा नोटिस जारी (Notice issued by bank) करने के बाद भी अगर उधारकर्ता भुगतान नहीं करता है तो ऐसे में बैंक के पास कुछ कानूनी अधिकार होते हैं। ऐसी परिस्थिती में बैंक गिरवी रखे हुए एसेट पर पर कब्जा ले सकता है। उसके बाद एसेट की वैल्यूएशन करवाई होती है और फिर उसे टेंडर, पब्लिक ऑक्शन या ई-ऑक्शन के माध्यम से बेचा जा सकता है। SARFAESI कानून के अंतर्गत (Under the SARFAESI Act) बैंक को ऐसी वसूली के लिए कोर्ट से परमिशन लेने की जरूरत नहीं है। हालांकि पूा प्रोसेस तय नियमों के तहत होता है।
जानकारो के अनुसार अगर उधारकर्ता समय के अनुसार ही एरियर राशि को चुकता कर देता है तो ऐसे में नीलामी का प्रोसेस (auction process) रोका जा सकती है और प्रोपर्टी नीलाम होने से बचाई जा सकती है। इस वजह से अगर ईएमआई मिस हो जाए तो उधारकर्ता को जल्द से जल्द बैंक से बातचीत कर और भुगतान की व्यवस्था करना सही रहता है।
