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ऐसे हुई थी PhonePe की शुरूआत, अब दे रहा इन बड़ी कंपनियों को टक्कर

आज के समय हर दूसरा व्यक्ति पेमेंट के लिए यूपीआई का इस्तेमाल जरूर करता है। ऐसा ही एक यूपीआई पेमेंट प्लेटफॉर्म फोनपे भी है। लेकिन क्या आप इसके पीछे की कहानी जानते हैं? अगर नहीं, तो ये खबर आपके काम की है। आइए नीचे विस्तार से पढ़ते हैं पूरी कहानी- 

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ऐसे हुई थी PhonePe की शुरूआत, अब दे रहा इन बड़ी कंपनियों को टक्कर

HR Breaking News (डिजिटल डेस्क)। फोनपे उन यूपीआई पेमेंट प्लेटफॉर्म में शामिल है जिन्हें सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. पिछले 6 सालों में UPI इंडस्ट्री में यह मार्केट लीडर बनकर उभरा है. मोबाइल रिचार्ज से लेकर रेस्तरां में पेमेंट्स तक के लिए इसका इस्तेमाल किया जा रहा है. फोनपे को लॉन्च करने वक्त कई चुनौतियां थीं, क्योंकि इसकी शुरुआत 2015 में हुई थी जब नोटबंदी नहीं हुई. यह वो दौर था जब लोग डिजिटल पेमेंट करने से कतराते थे.

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2016 में हुई नोटबंदी कंपनी के लिए भले ही वरदान साबित हुई, लेकिन चुनौतियां खत्म नहीं हईं. कैशलेस ट्रांजेक्शन बढ़ने पर गूगल-पे और पेटीम जैसे यूपीआई पेमेंट प्लेटफॉर्म्स ने भी टक्कर दी. जानिए, फोन-पे का अब तक का सफर-

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फ्लिपकार्ट छोड़कर आए कर्मचारियों ने शुरू की कंपनी


फोनपे की शुरुआत फ्लिपकार्ट छोड़कर आए तीन कर्मचारियों ने मिलकर की. 2015 में फोनपे को फाउंड समीर निगम और राहुल चारी और कोफाउंडर बुर्जिन इंजीनियर ने मिलकर शुरू किया.

समीर निगम: कंपनी के फाउंडर होने के साथ समीर सीईओ भी हैं. उन्होंने फ्लिपकार्ट के इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में बतौर सीनियर वाइस प्रेसिडेंट भी काम किया है. उन्होंने मुंबई यूनिवर्सिटी की ग्रेजुएशन और द वार्टन स्कूल से MBA किया है.

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राहुल चारी: राहुल कंपनी के फाउंडर और CTO हैं. इंजीनियर बैंकग्राउंड से ताल्लुक रखने वाले राहुल ने सन माइक्रोसिस्टम्स से इंटर्नशिप की. इसके अलावा वो सिस्को सिस्टम्स और फ्लिपकार्ट में कई बड़ी पोजिशंस पर रहे हैं.
बुर्जिन इंजीनियर: बुर्जिन फोनपे के लिए को-फाउंडर और CRO यानी चीफ रिलायबिलिटी ऑफिसर हैं. बुर्जिन ने भी फ्लिपकार्ट में काम किया है. इसके अलावा बतौर डायरेक्टर ऑफ इंजीनियरिंग mime360 और शॉपजिला जैसे संस्थानों में सेवाएं दी.

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फोनपे ने उड़ान भरी तो फ्लिपकार्ट ने ही खरीदा


फोनपे की शुरुआत ‘करते जा, भरते जा’ नाम की टैगलाइन के साथ हुई. इस लाइन ने लोगों को आकर्षित किया और सकारात्मक असर छोड़ा. फोनपे की शुरुआत 2015 में हुई और जब कंपनी ने सफलता की उड़ान भरी तो उसके ठीक एक साल बाद इसे खुद फ्लिपकार्ट ने खरीद लिया. स्टार्टअपस्काय की रिपोर्ट के मुताबिक, फोनपे में फ्लिपकार्ट की 87 फीसदी हिस्सेदारी है.

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नोटबंदी के बाद फोनपे के यूजर्स बढ़ने शुरू हुए, लेकिन गूगल पे और पेटीएम जैसे प्लेटफॉर्म्स से कॉम्प्टिीशन भी मिला. कंपनी ने हमेशा दो बातों पर फोकस किया सुरक्षित पेमेंट और सुरक्षित डाटा. इसके अलावा आमिर खान समेत कई सेलिब्रिटीज ने फोनपे के लिए प्रचार किया. कॉम्पिटीशन के बावजूद फोनपे ने अपनी मार्केटिंग और सक्सेसफुल पेमेंट रेट को मेंटेन किया.

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लॉन्चिंग के बाद कंपनी ने ऐप सिर्फ पेमेंट ही नहीं, दूसरी सर्विसेज को भी देना शुरू किया. इसमें फूड, रिचार्ज और ग्रोसरी की खरीदारी का भी विकल्प दिया. धीरे-धीरे इसमें इलेक्ट्रिक बिल्स और गैस बिल्स जैसी यूटिलिटी को शामिल किया गया. इसके अलावा इसमें कई सुविधाएं दी गईं. इस तरह फोनपे रोजमर्रा की जरूरत का अहम हिस्सा बन गया. वर्तमान में देशभर में फोनपे के लिए 3500 कर्मचारी काम कर रहे हैं.
 

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